Abujhmad Ground Report: छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा पर फैला घना और रहस्यमयी अबूझमाड़ इलाका, जो कभी नक्सलियों का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था, अब पूरी तरह नक्सलमुक्त हो चुका है. यह वही इलाका है जहां दशकों तक सुरक्षा बलों के जाने में भी डर लगता था, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. करीब 35 साल तक महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के इस इलाके में नक्सलियों का दबदबा रहा. खासकर गड़चिरोली के मालेवाड़ा गांव में कभी गोलियों की आवाज गूंजती थी. यहां तक कि नक्सलियों ने ग्राम पंचायत तक को आग के हवाले कर दिया था. लेकिन आज वही गांव शिक्षा और विकास की ओर बढ़ रहा है. गड़चिरोली के एसपी नीलोत्पल ने बताया कि पिछले एक साल में सुरक्षा बलों ने अबूझमाड़ के अंदर 7 फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस बनाए. करीब 1500 स्क्वायर किलोमीटर के इलाके में जो सुरक्षा की कमी थी, उसे पूरी तरह खत्म कर दिया गया. अब इस पूरे क्षेत्र में माओवादियों की कोई गतिविधि नहीं बची है. उन्होंने यह भी बताया कि 4 फरवरी को सुरक्षा बलों ने अबूझमाड़ में ऑपरेशन चलाकर बड़े माओवादी नेता डीकेजीसी प्रभाकर को भी मार गिराया. यह इस अभियान की बड़ी कामयाबी मानी जा रही है. अब यहां के लोगों की जिंदगी भी बदल रही है. पुलिस मदद केंद्र के जरिए गांववालों को कंप्यूटर, साइकिल, सिलाई मशीन और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि अब वे बिना डर के जी पा रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई भी बेहतर हो रही है. अबूझमाड़ से गुजरने वाला नेशनल हाईवे 130D भी अब विकास की नई राह खोल रहा है. हालांकि, सुरक्षा बल अभी भी यहां सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं ताकि सड़कों के नीचे छिपाए गए आईईडी को पूरी तरह खत्म किया जा सके.
EXCLUSIVE: जहां गूंजती थीं गोलियां, अब बह रही है शिक्षा की धारा… अबूझमाड़ से नक्सलवाद का सफाया
