Surguja News: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में नील हरित शैवाल विकसित किया जा रहा है. यह खरीफ सीजन में फसल उत्पादन बढ़ाने में मदद करेगा. किसानों को इसके उपयोग की जानकारी देने के लिए एक मॉडल और पुस्तक भी तैयार की गई है, जिससे वे आसानी से इसे अपनाना सीख सकें.
देसी तकनीक का कमाल! अब यूरिया नहीं, नील-हरित शैवाल बढ़ाएगा फसल की ताकत
