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7.8% ग्रोथ पर सीतारमण का बड़ा बयान

नई दिल्ली/न्यूयॉर्क। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित करते हुए कहा है कि वैश्विक स्तर पर जारी चुनौतियों के बावजूद भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की शानदार आर्थिक वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने कहा कि तमाम बाहरी दबावों और अनिश्चितताओं के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

निर्मला सीतारमण ने बुधवार को न्यूयॉर्क में आयोजित एक उच्चस्तरीय बिजनेस राउंडटेबल में निवेशकों को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस कार्यक्रम का आयोजन न्यूयॉर्क स्थित भारत के कॉन्सुलेट जनरल ने बैंक ऑफ अमेरिका के सहयोग से किया था। बैठक में निवेश और आर्थिक अवसरों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।

वित्त मंत्री ने निवेशकों के सामने भारत की आर्थिक विकास दर का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है। उन्होंने इसे शानदार ग्रोथ बताते हुए कहा कि भारत कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बीच भी अपनी विकास गति बनाए रखने में सफल रहा है।

सीतारमण ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक अनिश्चितता, व्यापार संबंधी चुनौतियां और भू-राजनीतिक तनाव जैसी परिस्थितियां बनी हुई हैं। इसके बावजूद भारत का प्रदर्शन मजबूत रहा है। उनका कहना था कि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास क्षमता और घरेलू बाजार की मजबूती ने देश को वैश्विक दबावों के बीच आगे बढ़ने में मदद की है।

राउंडटेबल में मौजूद निवेशकों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने भारत को वैश्विक निवेश के लिए महत्वपूर्ण गंतव्य के रूप में पेश किया। उन्होंने आर्थिक विकास के आंकड़ों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि भारत की विकास कहानी मजबूत बनी हुई है और आने वाले वर्षों में भी देश में निवेश के व्यापक अवसर मौजूद हैं।

वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं बदलते व्यापारिक माहौल और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का सामना कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी अनिश्चितताओं का असर व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ रहा है। ऐसे माहौल में भारत की उच्च विकास दर को सरकार अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेत के रूप में पेश कर रही है।

सीतारमण ने कहा कि भारत सभी चुनौतियों के बावजूद दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उनका जोर इस बात पर रहा कि देश की आर्थिक वृद्धि केवल मौजूदा परिस्थितियों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के पास लंबी अवधि में विकास की गति बनाए रखने की क्षमता भी मौजूद है।

न्यूयॉर्क में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक का उद्देश्य वैश्विक निवेशकों के साथ भारत के आर्थिक परिदृश्य और निवेश संभावनाओं पर संवाद करना था। वित्त मंत्री ने निवेशकों के सामने भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए देश में उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। इस दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर प्रमुख चर्चा का विषय रही।

भारत के लिए विदेशी निवेश आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार पिछले कई वर्षों से विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में वैश्विक निवेश आकर्षित करने पर जोर देती रही है। ऐसे में न्यूयॉर्क में आयोजित बिजनेस राउंडटेबल को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों तक भारत की आर्थिक संभावनाओं को पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सीतारमण ने अपने संबोधन में वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए यह संकेत दिया कि भारत बाहरी परिस्थितियों से पूरी तरह अछूता नहीं है, लेकिन इसके बावजूद देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है। वित्त मंत्री के मुताबिक 7.8 प्रतिशत की वृद्धि इसी मजबूती का उदाहरण है।

पहली तिमाही के आर्थिक प्रदर्शन को लेकर सरकार का सकारात्मक रुख ऐसे समय सामने आया है जब वैश्विक बाजारों में निवेशक प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर और नीतिगत दिशा पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। भारत की बड़ी आबादी, घरेलू मांग और तेजी से विकसित हो रहे विभिन्न क्षेत्रों को निवेश की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।

वित्त मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के साथ बातचीत के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की क्षमता पर भरोसा जताया। उनका संदेश था कि वैश्विक परिस्थितियां कठिन होने के बावजूद भारत विकास की अपनी रफ्तार को बनाए हुए है। उन्होंने 7.8 प्रतिशत की वृद्धि को देश की आर्थिक मजबूती और अनुकूल विकास संभावनाओं के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया।

भारत की तेज आर्थिक वृद्धि का असर रोजगार, उद्योग, बुनियादी ढांचे और निवेश जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ता है। उच्च विकास दर को बनाए रखना सरकार के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे देश में नई आर्थिक गतिविधियों और निवेश को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

न्यूयॉर्क जैसे प्रमुख वैश्विक वित्तीय केंद्र में निवेशकों के सामने भारतीय अर्थव्यवस्था की उपलब्धियों को रखने का उद्देश्य विदेशी निवेशकों का भरोसा और मजबूत करना भी है। बैंक ऑफ अमेरिका के सहयोग से आयोजित बैठक में वित्त मंत्री की मौजूदगी ने भारत और अंतरराष्ट्रीय निवेश समुदाय के बीच आर्थिक संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान किया।

सरकार का मानना है कि आर्थिक सुधारों, निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों और घरेलू मांग के कारण भारत आने वाले समय में भी वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वित्त मंत्री का बयान भी इसी विश्वास को सामने रखता है।

सीतारमण ने स्पष्ट किया कि वैश्विक मुश्किलों के बावजूद भारत ने अपनी आर्थिक गति को बनाए रखा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि को उन्होंने शानदार प्रदर्शन बताया। उनके मुताबिक यह उपलब्धि बताती है कि भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति बनाए हुए है।

न्यूयॉर्क में निवेशकों के साथ हुई इस बैठक के जरिए भारत ने एक बार फिर अपनी विकास क्षमता और निवेश संभावनाओं को वैश्विक मंच पर सामने रखा है। आने वाले समय में वैश्विक परिस्थितियां किस दिशा में जाती हैं, इस पर आर्थिक प्रदर्शन निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल सरकार पहली तिमाही की 7.8 प्रतिशत वृद्धि को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत संकेत के रूप में देख रही है।

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