झीरम घाटी हमले के 13 साल बाद अंतिम फैसला आया है. प्रत्यक्षदर्शी विवेक वाजपेयी ने हमले की खौफनाक कहानी सुनाई. उन्होंने बताया कि गोलियां बारिश की बूंदों की तरह बरस रही थीं. आज भी उनकी गाड़ी पर मौजूद गोलियों के निशान उस हमले की गवाही देते हैं.
बारिश की बूंदों की तरह बरस रही थी गोलियां! काफिले को घेर कर किया हमला, झीरम घाटी हमले की खौफनाक इनसाइड स्टोरी
