Aichi-नागोया : आइची-नागोया। भारत की जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे बुधवार को एशियाई खेल 2026 में महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीतने से चूक गईं। ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में उन्हें मंगोलिया की नारंतसेत्सेग गनबातार के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की चैंपियन अस्मिता ने दिन की शुरुआत शानदार अंदाज में की थी और रेपेशाज के जरिए पदक मुकाबले तक पहुंचीं, लेकिन अंतिम चुनौती पार नहीं कर सकीं। अंतरराष्ट्रीय जूडो महासंघ भी गनबातार को मंगोलिया की खिलाड़ी के रूप में सूचीबद्ध करता है।
ब्रॉन्ज मेडल बाउट में मुकाबला कड़ा रहा, लेकिन गनबातार ने वाजा-अरी के जरिए बढ़त हासिल करते हुए अस्मिता की पदक उम्मीदों को खत्म कर दिया। इस हार के साथ भारतीय खिलाड़ी को महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में पांचवें स्थान से संतोष करना पड़ा। अस्मिता के लिए यह परिणाम निराशाजनक रहा क्योंकि वह पदक से केवल एक जीत दूर थीं।
अस्मिता ने अपने अभियान की शुरुआत राउंड ऑफ 16 में वियतनाम की हा नगोक ची के खिलाफ की थी। भारतीय जूडोका ने इस मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिद्वंद्वी को इप्पोन से हराया और क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। इप्पोन जूडो में निर्णायक स्कोर माना जाता है और इससे मुकाबला तुरंत समाप्त हो जाता है। इस जीत के बाद अस्मिता से पदक की उम्मीदें बढ़ गई थीं।
क्वार्टर फाइनल में हालांकि उनकी चुनौती काफी कठिन हो गई। उनके सामने कजाकिस्तान की अनुभवी अबिबा अबुझाकिनोवा थीं, जो विश्व चैंपियनशिप में कई बार पदक जीत चुकी हैं। अबिबा ने अस्मिता को इप्पोन से हराया। इस हार के बावजूद भारतीय खिलाड़ी की पदक उम्मीदें समाप्त नहीं हुईं और उन्हें रेपेशाज के जरिए ब्रॉन्ज मेडल तक पहुंचने का एक और मौका मिला।
रेपेशाज में अस्मिता का सामना हांगकांग चीन की वोंग का ली से हुआ। इस मुकाबले में उन्होंने वापसी करते हुए युको स्कोर के जरिए जीत हासिल की और कांस्य पदक मुकाबले में प्रवेश कर लिया। एक समय क्वार्टर फाइनल की हार के बाद अस्मिता का अभियान मुश्किल में दिखाई दे रहा था, लेकिन रेपेशाज में उनका प्रदर्शन मजबूत रहा।
ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में अस्मिता के सामने अनुभवी गनबातार थीं। 31 वर्षीय मंगोलियाई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय जूडो में लंबे समय से सक्रिय हैं और ग्रैंड स्लैम तथा विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में कई पदक जीत चुकी हैं। गनबातार सितंबर 2026 की विश्व रैंकिंग में महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में 13वें स्थान पर थीं। ऐसे में भारतीय खिलाड़ी के सामने आसान चुनौती नहीं थी।
कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन के बाद अस्मिता से एशियाई खेलों में भी पदक की उम्मीद की जा रही थी। ग्लासगो में उन्होंने भारत के लिए जूडो में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता था और इसके बाद उनका अगला बड़ा लक्ष्य एशियाई खेलों के पोडियम तक पहुंचना था। हालांकि आइची-नागोया में उन्होंने कई मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को चुनौती दी, लेकिन कांस्य पदक मुकाबले में उनका अभियान समाप्त हो गया
दूसरी ओर टेनिस में भी भारत को पुरुष डबल्स में झटका लगा। अनिरुद्ध चंद्रशेखर और ओलंपियन एन श्रीराम बालाजी की जोड़ी क्वार्टर फाइनल में चीन के जियांग फुमिन और तियानहुई झांग से हारकर बाहर हो गई। भारतीय जोड़ी इस मुकाबले में शीर्ष वरीयता प्राप्त जोड़ियों में शामिल थी और उससे पदक की उम्मीद थी। क्वार्टर फाइनल में दोनों जोड़ियों के बीच लंबा और बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिला।
अनिरुद्ध और बालाजी पहला सेट टाईब्रेक में 6-7 (4) से हार गए। इसके बाद भारतीय जोड़ी ने दूसरे सेट में वापसी की और एक और रोमांचक टाईब्रेक में 7-6 (9) से सेट अपने नाम किया। मैच का फैसला सुपर टाईब्रेक में हुआ, जहां चीनी जोड़ी ने 10-8 से जीत हासिल करते हुए सेमीफाइनल में जगह बनाई। भारतीय जोड़ी को बेहद करीबी मुकाबले के बावजूद टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा।
यह हार इसलिए भी निराशाजनक रही क्योंकि एशियाई खेलों के टेनिस में सेमीफाइनल में पहुंचते ही कम से कम कांस्य पदक सुनिश्चित हो जाता है। अनिरुद्ध और बालाजी सिर्फ एक मुकाबला जीतकर पदक पक्का कर सकते थे, लेकिन अंतिम सुपर टाईब्रेक में मामूली अंतर से पीछे रह गए। चीन की जोड़ी ने निर्णायक क्षणों में बेहतर नियंत्रण रखते हुए मुकाबला अपने नाम किया।
जूडो और टेनिस दोनों में बुधवार का दिन भारत के लिए मिली-जुली निराशा लेकर आया। अस्मिता डे ने राउंड ऑफ 16 और रेपेशाज में जीत दर्ज कर कांस्य पदक मुकाबले तक पहुंचकर मजबूत चुनौती पेश की, लेकिन पोडियम से एक कदम दूर रह गईं। वहीं अनिरुद्ध चंद्रशेखर और श्रीराम बालाजी की अनुभवी जोड़ी ने तीन हिस्सों तक चले कड़े मुकाबले में संघर्ष किया, लेकिन निर्णायक सुपर टाईब्रेक ने उनकी पदक उम्मीदों को समाप्त कर दिया।
