छत्तीसगढ़ में सोन पत्ती बांटने की परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही है. दशहरे के दिन लोग इसे सोने के प्रतीक के रूप में एक-दूसरे को भेंट कर विजय की खुशी साझा करते हैं. यह परंपरा याद दिलाती है कि त्योहारों का असली उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि रिश्तों में मिठास घोलना, द्वेष मिटाना और समाज को प्रेम के सूत्र में बांधना भी है. यही वजह है कि सोन पत्ती का एक छोटा-सा पत्ता दशहरे पर बड़े सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश का वाहक बन जाता है.
दिल से दिल जोड़ने और द्वेष मिटाने का संदेश देती है सोन पत्ती! छत्तीसगढ़ में दशहरे पर बांटने की अनूठी परंपरा
