पुरी से बस्तर तक कैसे पहुंची रथयात्रा की परंपरा? 16 पहियों वाले रथ से जुड़ा गोंचा पर्व का इतिहास
पुरी की तर्ज पर मनाए जाने वाले बस्तर के गोंचा पर्व का इतिहास 600 साल से अधिक पुराना है. मान्यता है कि बस्तर के राजा पुरुषोत्तम देव को पुरी से 16 पहियों वाला रथ भेंट किया गया था. इसी परंपरा से बस्तर की रथयात्रा की शुरुआत मानी जाती है. बस्तर में तोप से तुपकी का रूप लिया गया है, जिससे रथ को सलामी दी जाती है. यह बांस से बनाई जाती है.
