आंखों की रोशनी नहीं, लाठी के सहारे चलते हैं लेकिन हौसला बुलंद… जानिए कैसे आत्मनिर्भर बने विपिन
बिलासपुर के विपिन परमार दिव्यांगता के बावजूद राखी बेचकर आत्मनिर्भर बने हैं. आंखों से दिखाई नहीं देने के बावजूद वे लाठी के सहारे शहर में राखियां बेचते हैं. विपिन राखी बेचकर रोजाना करीब ₹800 से ₹1000 तक कमा लेते हैं. उनका हौसला और मेहनत समाज के लिए प्रेरणा की मिसाल है.
