नगरनार स्टील प्लांट में परिवहन को लेकर छिड़ा विवाद, जय झाड़ेश्वर समिति और बस्तर परिवहन संघ आमने-सामने
जगदलपुर। बस्तर में औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ परिवहन कारोबार को लेकर विवाद भी लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। नगरनार स्टील प्लांट में उत्पादन शुरू होने के बाद एनएमडीसी के माल के परिवहन को लेकर अलग-अलग संस्थाओं और परिवहन समूहों के बीच काम और हिस्सेदारी को लेकर खींचतान सामने आ रही है। प्रशासन और पुलिस की कोशिशों के बावजूद परिवहन को लेकर विरोध प्रदर्शन, वाहनों की आवाजाही और जाम की स्थिति से आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ताजा मामला नगरनार एनएमडीसी से जुड़ी जय झाड़ेश्वर समिति का है। यह संस्था स्थानीय भूमि प्रभावितों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था के रूप में काम करती है। समिति की ओर से हाल में करीब 250 ट्रकों को संस्था से बाहर किए जाने की बात सामने आई है। समिति का कहना है कि बाहर किए गए ट्रक शहरी क्षेत्र से संबंधित हैं, जबकि स्थानीय लोगों को परिवहन के काम में प्राथमिकता देना जरूरी है।
स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने का दावा
नगरनार स्टील प्लांट में उत्पादन शुरू होने के साथ ही प्लांट से जुड़े कारोबार और परिवहन कार्यों में हिस्सेदारी को लेकर अलग-अलग समूह सक्रिय हुए हैं। स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने को लेकर भी कई संगठन अपनी मांगें उठा रहे हैं। जय झाड़ेश्वर समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि ट्रकों को बाहर करने का फैसला किसी व्यक्ति या समूह को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि व्यवस्था को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
समिति के अनुसार स्थानीय भूमि प्रभावितों और क्षेत्र के लोगों को परिवहन के काम में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। समिति की ओर से यह भी कहा गया है कि काम की उपलब्धता के अनुसार बाहर किए गए ट्रक संचालकों को भविष्य में सदस्यता में वापस लिया जा सकता है। यानी मौजूदा कार्रवाई को स्थायी रूप से बाहर करने के बजाय काम के वितरण और व्यवस्था को नियंत्रित करने की प्रक्रिया के तौर पर बताया जा रहा है।
बस्तर परिवहन संघ ने जताई आपत्ति
इधर बस्तर में लंबे समय से परिवहन कारोबार से जुड़ी संस्था बस्तर परिवहन संघ ने जय झाड़ेश्वर समिति के फैसले पर आपत्ति जताई है। संघ का आरोप है कि समिति मनमाने तरीके से ट्रक संचालकों को बाहर कर रही है, जबकि उसे इस तरह की कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।
परिवहन संघ का कहना है कि संगठन के दबाव का इस्तेमाल कर परिवहन के काम में एकाधिकार या मोनोपोली स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। संघ की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि चुनिंदा ट्रक संचालकों को जानबूझकर समिति से बाहर किया गया है। इस विवाद के चलते नगरनार क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था को लेकर एक बार फिर टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। हालांकि दोनों पक्ष स्थानीय हित और परिवहन व्यवस्था को लेकर अपने-अपने तर्क सामने रख रहे हैं।
पुराना है परिवहन विवाद बस्तर में परिवहन को लेकर विवाद
कोई नया मामला नहीं है। औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ स्थानीय लोगों को परिवहन और रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग लंबे समय से उठती रही है। समय-समय पर सरकार और प्रशासन की ओर से भी स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास किए जाते रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर परिवहन कारोबार से जुड़े संगठनों और वाहनों की संख्या लगातार बढ़ने से काम के बंटवारे को लेकर प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है। इसका असर औद्योगिक संस्थानों के साथ-साथ माल खरीदने वाली निजी कंपनियों और आम लोगों पर भी पड़ता है।
बार-बार होने वाले विरोध प्रदर्शन, वाहनों की लंबी कतार और सड़क पर जाम की स्थिति से आम यातायात प्रभावित होता है। ऐसे में नगरनार में सामने आए नए विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि स्थानीय हित, परिवहन कारोबार और औद्योगिक जरूरतों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। फिलहाल जय झाड़ेश्वर समिति और बस्तर परिवहन संघ के बीच मतभेद सामने हैं। अब प्रशासन के स्तर पर इस विवाद को किस तरह सुलझाया जाता है और परिवहन व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर है।
