अंतरराष्ट्रीय

फ्रांस में फिर बड़े आंदोलन की तैयारी, 24 अक्टूबर को प्रदर्शन का ऐलान

पेरिस। फ्रांस में बढ़ती महंगाई, खराब होती शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। देश की प्रमुख ट्रेड यूनियन ‘जनरल कॉन्फेडरेशन ऑफ लेबर’ (CGT) की महासचिव सोफी बिनेट ने प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू से श्रमिकों और युवा प्रदर्शनकारियों की मांगों पर गंभीरता से ध्यान देने की अपील की है।

उन्होंने चेतावनी दी कि देश में लोगों के बीच भारी और जायज नाराजगी है, जिसे केवल पुलिस कार्रवाई और सख्ती के जरिए शांत नहीं किया जा सकता।समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, सोफी बिनेट ने बुधवार, 21 अक्टूबर को आरटीएल रेडियो को दिए साक्षात्कार में सरकार के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को युवाओं और कर्मचारियों की समस्याओं का राजनीतिक समाधान तलाशना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में असंतोष की वास्तविक वजहों को समझना और उनका समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है।

सरकार को जनता की मांगों का जवाब देना होगा

सोफी बिनेट ने कहा कि फ्रांस में श्रमिकों, छात्रों और आम नागरिकों के बीच बढ़ता असंतोष गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने प्रधानमंत्री लेकोर्नू से ट्रेड यूनियनों और प्रदर्शनकारी युवाओं की मांगों पर ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।बिनेट ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों और युवाओं के हितों को भी उतनी ही प्राथमिकता देनी चाहिए, जितनी वह बड़े उद्योगपतियों और कंपनियों को देती है।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो सामाजिक असंतोष और गहरा सकता है।

छात्रों से शुरू हुआ आंदोलन देशभर में फैला

फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत शिक्षा व्यवस्था में सुधार और स्कूलों की खराब स्थिति को लेकर छात्रों तथा शिक्षकों के असंतोष से हुई थी। धीरे-धीरे यह आंदोलन महंगाई, वेतन और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े व्यापक विरोध में बदल गया।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लगातार बढ़ती जीवन-यापन की लागत के कारण आम परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। वहीं, शिक्षा संस्थानों में पर्याप्त संसाधनों की कमी और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति भी नाराजगी की प्रमुख वजह बनी हुई है।17 अक्टूबर को देशभर में हुए बड़े प्रदर्शनों के दौरान कई शहरों में हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई थीं। हालांकि, बड़ी संख्या में लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखी थीं।

न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग

सीजीटी ट्रेड यूनियन ने सरकार के सामने कई आर्थिक और सामाजिक मांगें रखी हैं। इनमें न्यूनतम वेतन में वृद्धि, महंगाई के अनुपात में कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी और स्कूलों तथा सार्वजनिक सेवाओं के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराना शामिल है।यूनियन का कहना है कि बढ़ती कीमतों के मुकाबले कर्मचारियों की आय में पर्याप्त वृद्धि नहीं होने से उनकी क्रय शक्ति प्रभावित हो रही है।संगठन ने शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए सरकारी निवेश बढ़ाने की भी मांग की है।

24 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा सख्त

फ्रांस में आगामी 24 अक्टूबर को नए विरोध प्रदर्शनों की तैयारी की जा रही है। इन प्रदर्शनों को देखते हुए प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने व्यापक पुलिस तैनाती का आश्वासन दिया है।पिछले दिनों हुई हिंसा के बाद पेरिस सहित कई शहरों के प्रभावित इलाकों में कर्फ्यू और अन्य सुरक्षा प्रतिबंध लागू किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाना है।

पुलिस कार्रवाई के बजाय बातचीत पर जोर

सोफी बिनेट ने प्रदर्शनकारियों की मांगों का समाधान करने के लिए सरकार और ट्रेड यूनियनों के बीच बातचीत की आवश्यकता बताई है।उन्होंने कहा कि देश में मौजूद नाराजगी का जवाब दमन नहीं, बल्कि राजनीतिक पहल और ठोस फैसले होने चाहिए।इस बीच फ्रांस की प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने 5 नवंबर को देशव्यापी लामबंदी का आह्वान भी किया है। हालांकि, सीजीटी ने 24 अक्टूबर के प्रदर्शनों में आधिकारिक भागीदारी को लेकर तत्काल स्पष्ट घोषणा नहीं की थी।

प्रधानमंत्री के सामने दोहरी चुनौती

फ्रांसीसी सरकार के सामने एक ओर हिंसा और तोड़फोड़ पर नियंत्रण रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की आर्थिक और सामाजिक मांगों का समाधान निकालने का दबाव भी बढ़ रहा है।ट्रेड यूनियनों और छात्र संगठनों की बढ़ती सक्रियता ने प्रधानमंत्री लेकोर्नू के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। अब 24 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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