छत्तीसगढ़

मिट्टी की सेहत से संवरेगा खेती का भविष्य, ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को किया गया जागरूक

प्राकृतिक एवं जैविक खेती के साथ संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा संरक्षण पर दिया गया जोर

किसान-वैज्ञानिक संवाद में खेती की समस्याओं का हुआ समाधान, 38 किसानों ने लिया भाग

रायपुर, 27 अक्टूबर 2026: छत्तीसगढ़ में मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर-एनआईबीएसएम), रायपुर द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा एवं कृषि विभाग के संयुक्त सहयोग से जिले के विकासखंड नवागढ़ अंतर्गत ग्राम अंधियारखोर में ‘खेत बचाओ अभियान-2026’ के तहत किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने तथा उर्वरकों के वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक किया गया।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. पी. मुवेंथन एवं डॉ. योगेश येले ने किसानों से सीधा संवाद कर मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और टिकाऊ खेती के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बेहतर फसल उत्पादन के लिए मिट्टी की सेहत बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने से न केवल खेती की लागत कम की जा सकती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और फसलों की उत्पादकता को भी लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है।

वैज्ञानिकों ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व एवं उसमें दी गई अनुशंसाओं के अनुरूप पोषक तत्वों के प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अनावश्यक एवं असंतुलित उपयोग से बचने तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्राकृतिक एवं जैविक खेती की उपयुक्त पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही कृषि संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया।
इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा के विषय विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र कुमार जोशी एवं श्री डोमन सिंह टेकाम तथा कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन एवं बेहतर फसल प्रबंधन की जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित किसान-वैज्ञानिक संवाद में किसानों ने खेती से संबंधित विभिन्न समस्याओं एवं चुनौतियों को विशेषज्ञों के समक्ष रखा। वैज्ञानिकों ने किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुरूप व्यावहारिक एवं तकनीकी सुझाव दिए। उन्होंने किसानों से मृदा परीक्षण को नियमित कृषि गतिविधियों का हिस्सा बनाने तथा वैज्ञानिक खेती अपनाकर उत्पादन लागत कम करने और फसल की गुणवत्ता बढ़ाने का आह्वान किया।

‘खेत बचाओ अभियान-2026’ का मुख्य उद्देश्य किसानों तक आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की पहुंच सुनिश्चित करना, मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना है।

कार्यक्रम में ग्राम पंचायत अंधियारखोर के सरपंच सहित कृषि विभाग के अधिकारी एवं कृषक उपस्थित रहे। इस जागरूकता कार्यक्रम में कुल 38 किसानों ने भाग लिया, जिनमें तीन महिला किसान भी शामिल थीं। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को मृदा संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग एवं टिकाऊ खेती की उपयोगी जानकारी प्राप्त हुई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *