छत्तीसगढ़

वैज्ञानिक पशुपालन से आत्मनिर्भरता की राह पर अनूप कश्यप

उन्नत नस्ल की गायों और बछियों से बढ़ी आय, पशुधन विकास विभाग की योजनाओं और तकनीकी मार्गदर्शन से मिला संबल

रायपुर, 27 अक्टूबर 2026: पशुपालन को वैज्ञानिक तरीके से अपनाया जाए तो यह ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आय और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकता है। बलरामपुर जिले के रामानुजगंज निवासी श्री अनूप कुमार कश्यप ने शासकीय योजनाओं और पशुधन विकास विभाग के सहयोग से अपने पशुपालन को नियमित आय के साधन में बदल दिया है। कभी घरेलू जरूरतों तक सीमित रहा उनका पशुपालन अब उन्नत नस्ल की गायों और बछियों के साथ व्यवस्थित आजीविका का रूप ले चुका है। दूध की बिक्री से उन्हें नियमित आमदनी हो रही है।

श्री कश्यप की इस प्रगति में पशुधन विकास विभाग के कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम और निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कृत्रिम गर्भाधान से उनके पशुधन में उन्नत नस्ल की गायें और बछियां शामिल हुईं। विभागीय पशु चिकित्सक एवं मैदानी अमला समय-समय पर पशुओं का टीकाकरण और कृमिनाशक उपचार करते हैं। पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए कैल्शियम एवं विटामिन सप्लीमेंट्स भी उपलब्ध कराए जाते हैं। साथ ही, संतुलित आहार, देखभाल और पशु प्रबंधन के संबंध में तकनीकी सलाह दी जाती है।

उन्नत मादा वत्स पालन योजना से मिली आर्थिक सहायता ने बछियों के पालन-पोषण को बेहतर बनाने में मदद की है। इन बछियों के भविष्य में दुधारू गाय बनने से उनकी आय में और वृद्धि की संभावना है। योजनाओं का लाभ और विभागीय सहयोग मिलने से श्री कश्यप अब आसपास के पशुपालकों को भी उन्नत नस्ल, समय पर टीकाकरण और संतुलित पोषण अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में बलरामपुर जिले में पशुधन की नस्ल सुधार और पशु स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विगत तीन वर्षों में राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के तहत जिले में 36 हजार से अधिक कृत्रिम गर्भाधान किए गए हैं, जिनसे 17 हजार से अधिक उन्नत नस्ल के बछड़े-बछियों का जन्म हुआ है। दूरस्थ गांवों तक पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने के लिए मोबाइल वेटरनरी यूनिट और पशु स्वास्थ्य शिविर भी संचालित किए जा रहे हैं।

श्री अनूप कश्यप की सफलता यह दर्शाती है कि शासकीय योजनाओं का लाभ, विभागीय सहयोग और वैज्ञानिक पशुपालन का मेल ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। पशुपालन के माध्यम से स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में उनका प्रयास अन्य पशुपालकों के लिए भी प्रेरणास्रोत है।

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