पंचांग 10 अगस्त : सावन सोमवार और सोम प्रदोष का दुर्लभ महासंयोग; जानें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त और राहुकाल

सनातन धर्म में किसी भी मांगलिक या धार्मिक कार्य की शुरुआत से पहले पंचांग देखना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। 10 अगस्त (सोमवार) का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बेहद खास है। यह सावन (श्रावण) मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। सोमवार का दिन और ऊपर से सावन मास का संयोग होने के कारण आज ‘सावन सोमवार’ के साथ-साथ ‘सोम प्रदोष व्रत’ का अत्यंत दुर्लभ और पावन महासंयोग बन रहा है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए वर्ष के सबसे उत्तम दिनों में से एक है।
पंचांग के माध्यम से तिथि, नक्षत्र, योग, करण और शुभ-अशुभ मुहूर्तों की सटीक जानकारी प्राप्त होती है, जिससे आप अपने दिन के महत्वपूर्ण कार्यों को बिना किसी बाधा के योजनाबद्ध तरीके से पूरा कर सकते हैं। आइए जानते हैं 10 अगस्त का संपूर्ण पंचांग:
तिथि और संवत
- तारीख: 10 अगस्त
- दिन: सोमवार
- मास: श्रावण (सावन)
- पक्ष: कृष्ण पक्ष
- तिथि: त्रयोदशी तिथि (सोम प्रदोष व्रत एवं सावन सोमवार)
- विक्रम संवत: 2083
- शक संवत: 1948
सूर्य और चंद्रमा का समय
- सूर्योदय: प्रातः 05:48 बजे
- सूर्यास्त: सायं 07:02 बजे
- चंद्रोदय: प्रातः 05:50 बजे (11 अगस्त)
- चंद्रास्त: सायं 07:05 बजे
- चंद्र राशि: मिथुन राशि (सुबह तक), तत्पश्चात कर्क राशि
नक्षत्र, योग और करण
- नक्षत्र: पुनर्वसु नक्षत्र, तत्पश्चात पुष्य नक्षत्र
- योग: व्यतीपात योग, तत्पश्चात वरीयान योग
- करण: तैतिल करण, तत्पश्चात गर करण
शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:23 बजे से 05:05 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:53 बजे तक (रुद्राभिषेक, शिव पूजन और शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ)
- प्रदोष काल (शिव पूजा मुहूर्त): सायं 07:02 बजे से रात्रि 09:12 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:39 बजे से 03:32 बजे तक
- अमृत काल: रात्रि 08:20 बजे से 09:55 बजे तक
अशुभ समय और राहुकाल (Inauspicious Timings)
- राहुकाल: प्रातः 07:27 बजे से 09:06 बजे तक (इस समय के दौरान कोई भी नया कार्य या यात्रा शुरू करने से बचें)
- यमगंड: १०:४६ बजे से १२:२५ बजे तक
- गुलिक काल: दोपहर 02:05 बजे से 03:44 बजे तक
- दिशा शूल: पूर्व दिशा (सोमवार के दिन पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो घर से शीशा देखकर या दूध पीकर ही प्रस्थान करें)
