रायपुर में OBC दिवस समाज प्रमुखों ने उठाई 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग
रायपुर। राजधानी के वृंदावन हॉल में 10 सितंबर को ओबीसी दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न ओबीसी समाजों के प्रतिनिधि, समाज प्रमुख और बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। आयोजन के दौरान ओबीसी आरक्षण, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने ओबीसी समाज के लिए एक राष्ट्रीय एजेंडा तैयार करने की बात भी कही, जिसे आगे समाज प्रमुखों और जनप्रतिनिधियों के सामने रखने के बाद राष्ट्रपति को सौंपने का प्रस्ताव है।
कार्यक्रम में इंजीनियर नारायण साहू ने ओबीसी समाज को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की सरकारों ने ओबीसी समाज को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी, जिसके कारण समाज को अब तक 27 प्रतिशत आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल पाया है। नारायण साहू ने कहा कि संविधान लागू होने के बाद सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों की समस्याओं के समाधान की उम्मीद थी, लेकिन ओबीसी समाज से जुड़ी कई समस्याएं आज भी बनी हुई हैं। उन्होंने आरक्षण सहित समाज के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर संगठित होकर आवाज उठाने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम में घनाराम साहू ने ओबीसी वर्ग से चुनकर जाने वाले जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के बाद कई जनप्रतिनिधि ओबीसी समाज के मुद्दों को अपेक्षित तरीके से नहीं उठाते और राजनीतिक दलों के हितों को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा कि अब ओबीसी समाज को केवल किसी एक राजनीतिक दल की जीत या हार तक सीमित रहने के बजाय अपने मुद्दों को लेकर स्पष्ट रणनीति तैयार करनी चाहिए। समाज के प्रमुख मुद्दों को एक एजेंडे के रूप में तैयार कर जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सामने रखने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में शगुन लाल वर्मा ने ओबीसी दिवस और प्रस्तावित राष्ट्रीय एजेंडे को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि रायपुर से एक राष्ट्रीय एजेंडा तैयार करने की दिशा में पहल की जाएगी। इसके लिए विभिन्न ओबीसी समाजों से चर्चा कर उनके प्रमुख मुद्दों और मांगों को शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से जुड़े विषयों का भी उल्लेख किया और कहा कि ओबीसी समाज की लंबित मांगों को लेकर एक साझा प्रस्ताव तैयार किया जाना चाहिए। वक्ताओं के मुताबिक, प्रस्तावित राष्ट्रीय एजेंडे को अंतिम रूप देने के बाद राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत करने की योजना है।
कार्यक्रम के दौरान ओबीसी दिवस मनाए जाने की पृष्ठभूमि को लेकर भी चर्चा हुई। विष्णु बघेल ने बताया कि 10 सितंबर की तारीख को ओबीसी समाज के सामाजिक संघर्ष से जोड़कर देखा जाता है। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी आर.एल. चंदापुरी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि 10 सितंबर 1947 को पिछड़े वर्गों के उत्थान को लेकर एक आंदोलन की शुरुआत हुई थी। उन्होंने चूल्हाई राम साहू के योगदान और बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी ऐतिहासिक संघर्ष की स्मृति में 10 सितंबर को ओबीसी दिवस के रूप में मनाने की परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान अलग-अलग वक्ताओं ने शिक्षा, रोजगार, आरक्षण, सामाजिक भागीदारी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने समाज के लोगों से संगठित होकर संवैधानिक तरीके से अपने अधिकारों और मांगों को सामने रखने की अपील की। कार्यक्रम का मंच संचालन साहू रामलाल गुप्ता ने किया। अधिवक्ता शत्रुघ्न सिंह साहू ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया। इसके अलावा नरेंद्र वर्मा, पं. घनश्याम साहू, ईश्वर दानासिया, पार्वती साहू, विवेक पटेल, चंद्रशेखर चकोर, राहुल गुप्ता, मोतीचंद साहू और जेपी बौद्ध सहित अन्य वक्ताओं ने अपने विचार रखे। आयोजन में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ओबीसी समाज के अलग-अलग संगठनों और समुदायों के मुद्दों को एक साझा मंच पर लाकर राष्ट्रीय स्तर का एजेंडा तैयार किया जाए। इसके माध्यम से आरक्षण, प्रतिनिधित्व और अन्य मांगों को संबंधित संवैधानिक संस्थाओं तथा सरकार के सामने रखा जाएगा।
