आज का पंचांग 29 अक्टूबर 2026
शक संवत 1948, कार्तिक, कृष्ण, चतुर्थी, गुरुवार, विक्रम संवत् 2083। तदनुसार अंग्रेजी तारीख 29 अक्टूबर सन् 2026 ई॰। सूर्य दक्षिणायन, हेमंत ऋतु। राहुकाल दोपहर 02 बजकर 00 मिनट से 03 बजकर 30 मिनट तक। चतुर्थी तिथि रात्रि 10 बजकर 09 मिनट तक उपरांत पंचमी तिथि का आरंभ।
रोहिणी नक्षत्र प्रातः 11 बजकर 11 मिनट तक उपरांत मृगशिरा नक्षत्र का आरंभ। परिघ योग अगले दिन तड़के 12 बजकर 06 मिनट (30 अक्टूबर) तक उपरांत शिव योग का आरंभ। बव करण प्रातः 11 बजकर 37 मिनट तक उपरांत बालव करण का आरंभ। चन्द्रमा रात्रि 10 बजकर 06 मिनट तक वृषभ राशि पर उपरांत मिथुन राशि पर संचार करेगा।
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय का समय: प्रातः 06:31 बजे
सूर्यास्त का समय: सायं 05:38 बजे
चंद्रोदय का समय: रात्रि 08:17 बजे
चंद्रास्त का समय: प्रातः 09:52 बजे
सूर्य और चंद्रमा की राशियां
सूर्य देव: तुला राशि में स्थित हैं
चन्द्र देव: वृषभ राशि में (रात्रि 10:06 बजे तक), फिर मिथुन राशि में प्रवेश
आज का शुभ मुहूर्त 29 अक्टूबर 2026 :
अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11 बजकर 42 मिनट से 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।
अमृत काल : प्रातः 08 बजकर 17 मिनट से प्रातः 09 बजकर 44 मिनट तक तथा अगले दिन तड़के 01 बजकर 03 मिनट से तड़के 02 बजकर 30 मिनट (30 अक्टूबर) तक रहेगा।
आज का चौघड़िया मुहूर्त 29 अक्टूबर 2026 :
शुभ (उत्तम) : सुबह 06 बजकर 31 मिनट से 07 बजकर 54 मिनट तक।
रोग (सामान्य) : सुबह 07 बजकर 54 मिनट से 09 बजकर 18 मिनट तक।
उद्वेग (अशुभ) : सुबह 09 बजकर 18 मिनट से 10 बजकर 41 मिनट तक।
चर (सामान्य) : सुबह 10 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 05 मिनट तक।
आज का अशुभ मुहूर्त 29 अक्टूबर 2026 :
राहुकाल : दोपहर 02 बजकर 00 मिनट से 03 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।
गुलिक काल : सुबह 09 बजकर 00 मिनट से 10 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।
यमगंड : सुबह 06 बजकर 00 मिनट से 07 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।
करवा चौथ पूजा मुहूर्त: 29 अक्टूबर, शाम 05:38 से 06:56 बजे तक
अवधि: 01 घंटा 17 मिनट
व्रत समय: सुबह 06:31 से रात 08:17 बजे तक
चंद्रोदय समय: रात 08:17 बजे
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 29 अक्टूबर, तड़के 01:06 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त: 29 अक्टूबर, रात 10:09 बजे
आज का उपाय :आज गुरुवार व करवा चौथ के पावन अवसर पर माता पार्वती, भगवान शिव, गणेश जी और करवा माता की विधिवत पूजा करें, करवा चौथ की कथा सुनें और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत संपन्न करें।
